जब जज भी करने लगे AI का इस्तेमाल – तेज़ न्याय या बढ़ते खतरे?

दुनिया भर में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) ने जिस तरह से अलग-अलग उद्योगों में अपनी जगह बनाई है, अब वह न्यायपालिका यानी कोर्ट सिस्टम तक भी पहुँच चुका है। एक समय था जब AI का ज़िक्र सिर्फ़ टेक कंपनियों, रिसर्च लैब और स्टार्टअप्स में होता था, लेकिन अब अमेरिका के कई जज भी इसे अपनाने लगे हैं। उनका कहना है कि इससे काम की गति बढ़ती है, बैकलॉग कम हो सकता है और रिसर्च आसान हो जाती है।

लेकिन सवाल ये है — क्या यह ट्रेंड न्याय व्यवस्था के लिए वरदान है या संकट का कारण बन सकता है?

कोर्ट में AI की एंट्री – पृष्ठभूमि

कुछ साल पहले तक कोर्ट में AI का इस्तेमाल लगभग न के बराबर था। जज और वकील पारंपरिक तरीकों से ही केस स्टडी, प्रीसिडेंट (पूर्व के फैसले) और ऑर्डर तैयार करते थे। लेकिन हाल के महीनों में कई हाई-प्रोफ़ाइल मामलों में AI का दखल बढ़ा है।

समस्या तब शुरू हुई जब कुछ वकीलों ने AI टूल्स से केस डॉक्यूमेंट तैयार कर के कोर्ट में पेश किए, जिनमें ऐसे केस रेफरेंस थे जो असल में कभी हुए ही नहीं — इसे AI की भाषा में “Hallucination” कहते हैं। इस तरह की घटनाओं ने पूरी न्याय व्यवस्था को हिला कर रख दिया और कई वकीलों को जुर्माना भुगतना पड़ा।

जजों के अनुभव – अलग-अलग सोच

अब जब वकीलों के लिए AI का इस्तेमाल जोखिम भरा साबित हो रहा है, तो क्या जजों को भी इससे बचना चाहिए? इस पर विचार बँटा हुआ है।

1. जज Xavier Rodriguez (Texas)

Rodriguez ने 2018 से ही AI में रुचि लेना शुरू किया, यानी ChatGPT आने से चार साल पहले। उन्होंने पाया कि AI से केस समरी, टाइमलाइन, और मुख्य बिंदुओं की पहचान जैसे कार्य अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं।

  • उनका मानना है कि ऐसे काम, जिनमें मानवीय विवेक (Human Judgment) की ज़रूरत कम हो, AI को दिए जा सकते हैं।
  • लेकिन बेल (Bail) या सज़ा से जुड़े निर्णय में AI का दखल उन्हें खतरनाक लगता है।

2. जज Allison Goddard (California)

Goddard AI को एक “thought partner” मानती हैं, जो उन्हें नए दृष्टिकोण और विचार देता है।

  • वह ChatGPT और Claude जैसे टूल्स का रोज़ इस्तेमाल करती हैं, खासकर लंबी डॉक्यूमेंट्स को संक्षिप्त करने या जटिल केस को समझने के लिए।
  • लेकिन Criminal मामलों में, जहाँ बायस (Bias) का खतरा ज़्यादा है, वह AI का इस्तेमाल नहीं करतीं।

3. जज Scott Schlegel (Louisiana)

Schlegel इस ट्रेंड को “Crisis waiting to happen” कहते हैं।

  • उनका कहना है कि जब वकील AI से गलती करते हैं तो कोर्ट उन्हें दंडित कर सकता है, लेकिन अगर जज गलती करते हैं, तो वह कानून का हिस्सा बन जाती है
  • बाद में उस गलती को सुधारना बेहद मुश्किल, बल्कि लगभग असंभव हो सकता है।

AI in Judiciary
AI in Judiciary

AI के इस्तेमाल से जुड़े मुख्य खतरे

Hallucination का खतरा
AI बहुत आत्मविश्वास के साथ गलत जानकारी दे सकता है, जिससे गलत फैसले हो सकते हैं।

Bias (पक्षपात)
अगर AI के ट्रेनिंग डेटा में पक्षपात है, तो निर्णय भी पक्षपाती हो सकते हैं — और कोर्ट में यह बेहद गंभीर मुद्दा है।

कम पारदर्शिता
वकीलों की तुलना में जजों पर AI गलती की जवाबदेही देने का दबाव कम होता है, जिससे ट्रांसपेरेंसी का सवाल उठता है।

जनता का विश्वास
अगर यह बात सामने आती है कि किसी गंभीर केस (जैसे child custody या bail) में जज ने AI से सलाह ली, तो न्याय प्रणाली की साख को नुकसान हो सकता है।

समाधान और सुरक्षित उपयोग

विशेषज्ञ मानते हैं कि AI को अंतिम निर्णय लेने वाले टूल के रूप में नहीं, बल्कि सहायक टूल के रूप में इस्तेमाल करना ही सुरक्षित है।

  • सुरक्षित उपयोग के उदाहरण: केस समरी, डॉक्यूमेंट सर्च, प्रीसिडेंट लिस्ट, ट्रांस्क्रिप्ट बनाना।
  • जोखिम वाले उपयोग: सज़ा तय करना, बेल अनुमोदन, या तथ्यात्मक निष्कर्ष निकालना।

इसके अलावा, हर AI आउटपुट को मैन्युअली वेरिफाई करना ज़रूरी है। यह वैसा ही है जैसे किसी नए, अनुभवहीन वकील का काम देखकर उसकी हर बात को चेक करना।

न्यायपालिका का भविष्य – आगे का रास्ता

AI को नज़रअंदाज़ करना संभव नहीं है। आने वाले वर्षों में यह तकनीक और परिपक्व होगी, लेकिन अभी के लिए, इसका इस्तेमाल बेहद सतर्कता के साथ करना होगा।

AI का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह समय बचाता है और रिसर्च को तेज़ बनाता है — और सबसे बड़ा खतरा यह कि यह गलत या भ्रामक जानकारी भी उतनी ही तेज़ी से फैला सकता है।

अगर जज AI को सिर्फ़ सहायक की तरह इस्तेमाल करें और अपने विवेक व अनुभव से अंतिम फैसला लें, तो यह तकनीक कोर्ट सिस्टम में क्रांति ला सकती है। लेकिन अगर इसे बिना सोचे-समझे निर्णय लेने के लिए इस्तेमाल किया गया, तो यह जनता के विश्वास को गहरा नुकसान पहुँचा सकता है।

Disclaimer

इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न समाचार रिपोर्ट्स, इंटरव्यू और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। हम किसी भी तकनीकी या कानूनी दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करते। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी कानूनी, न्यायिक या तकनीकी निर्णय से पहले आधिकारिक स्रोतों और योग्य विशेषज्ञों की राय अवश्य लें।

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